"धर्मो रक्षति रक्षितः"

श्री ध्यानु भगत जी माता आदिशक्ति के परम भक्त माने जाते हैं। 
उनकी भक्ति, समर्पण एवं माता रानी के प्रति अटूट विश्वास आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्रों की अष्टमी को श्रद्धापूर्वक श्री ध्यानु भगत जयंती मनाई जाती है। 
हमारी गतिविधियाँ ;-
माता रानी के विशाल जागरण 
श्री ध्यानु भगत जयंती समारोह, धार्मिक यात्राएँ एवं दर्शन 
भंडारा एवं सेवा कार्य सम्मान समारोह सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम

आपका हार्दिक स्वागत है
अखिल भारतवर्षीय घराना श्री ध्यानु भगत जागरण ज्योति पंथ परिषद एक धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संगठन है, जो श्री ध्यानु भगत जी की पावन परंपरा, माता रानी की भक्ति तथा सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु कार्यरत है।हमारा उद्देश्य समाज में धार्मिक जागृति, आध्यात्मिक चेतना और सेवा भाव को बढ़ावा देना है।
हमारे उद्देश्य ;-
श्री ध्यानु भगत जी के जीवन एवं शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार .
माता रानी के जागरण एवं धार्मिक आयोजनों का संचालन.
 भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपराओं का संरक्षण .
धार्मिक एवं सामाजिक सेवा कार्य युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना
"धर्मो रक्षति रक्षितः"
श्री ध्यानु भगत जी माता आदिशक्ति के परम भक्त माने जाते हैं। 
उनकी भक्ति, समर्पण एवं माता रानी के प्रति अटूट विश्वास आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।प्रत्येक वर्ष आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्रों की अष्टमी को श्रद्धापूर्वक श्री ध्यानु भगत जयंती मनाई जाती है। 
हमारी गतिविधियाँ ;-
माता रानी के विशाल जागरण 
श्री ध्यानु भगत जयंती समारोह, धार्मिक यात्राएँ एवं दर्शन 
भंडारा एवं सेवा कार्य सम्मान समारोह सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम

सदस्यता अभियान

सदस्यता 🔹 वार्षिक सदस्य 🔹 आजीवन सदस्य 🔹 संरक्षक सदस्य "आइए, इस आध्यात्मिक अभियान का हिस्सा बनें और धर्म सेवा में अपना योगदान दें।"

धार्मिक सेवाएँ

माता रानी के जागरण का आयोजन श्री ध्यानु भगत जयंती समारोह भजन संध्या एवं कीर्तन धार्मिक यात्राओं का आयोजन दुर्गा सप्तशती एवं धार्मिक पाठ मंदिर एवं धार्मिक स्थलों पर सेवा कार्य

सामाजिक सेवाएँ

गरीब एवं जरूरतमंदों की सहायता भंडारा एवं अन्नदान सेवा वस्त्र वितरण रक्तदान शिविर सहयोग आपदा राहत एवं सेवा कार्य



  • Jwalamukhi, Himachal Pradesh, India
  • shri Dhyanu bhagat bhajan sthali, gupta bhawan jwalaji